मन कविता स्वाध्याय [ 4. Man Poem Question Answer Class 10th Hindi]

 मन कविता स्वाध्याय 


नमस्ते पाठकों, 

इस ब्लॉग में मन कविता का स्वध्याय [ 4. Man Poem Class 10Th ] दिया गया है । मन कविता कक्षा १० वीं कविता है । मन कविता के प्रश्न उत्तर आपकी सहायता जरूर करेंगे । 


Man Poem Hindi class 10th  question answer
मन कविता प्रश्न उत्तर | Mr. Suryawanshi 


पहला प्रश्न हमें संदेश लिखने के लिए है । 


प्रश्न: १) निम्नलिखित हाइकु द्वारा मिलने वाला संदेश


१) करते जाओ पाने की मत सोचो जीवन सरा ।


उत्तर: " करते जाओ पाने की मत सोचो जीवन सरा । " इस हाइकु से कवि हमें यह संदेश देना चाहते है कि हमें संपूर्ण जीवन बिना पाने की चाह रखते हुए कार्य करते रहना है ।  


 २) भीतरी कुंठा नयनों के द्वार से आई बाहर । 


उत्तर:  " भीतरी कुंठा नयनों के द्वार से आई बाहर । " इस हाइकु से हमें संदेश मिलता है कि व्यक्ति की परेशानी, उसका दुख उसकी आँखों से पता चलता है ।


प्रश्न: २) दूसरा प्रश्न हमें कृति करने के लिए दिया गया है हमें हाइकु में प्रयुक्त महीना और उसका ऋतु खोजने के लिए कहा गया है ।


हाइकु में फागुन महीना आया है और फागुन महीने में आने वाला ऋतु बसंत है ।


तो हमारा उत्तर हुआ : फागुन / फाल्गुन, बसंत 


प्रश्न: ३) तीसरे प्रश्न में हमें उत्तर लिखने के लिए कहा गया है । 


१. मँझधार में डोले - 

हम लिख सकते है [ जीवन नैया ]

२. छिपे हुए 

इसका उत्तर [ सितारे ] लिख सकते है

३. धुल गए 

इसका उत्तर [ विषाद ] लिख सकते है 

और

4. अमर हुए

तुमने दिए जिन गीतों को स्वर हुए अमर । अर्थात [ जिन गीतों को स्वर दिया गया ] हम इस तरह से उत्तर लिख सकते हैं । 


प्रश्न ४) चौथे प्रश्न में हमें केंद्रीय भाव स्पष्ट करना है । केंद्रीय भाव अर्थात दिए गए पद्यांश के पीछे कवि की क्या भावना है । 


१) चलतीं साथ 
पटरियाँ रेल की
फिर भी मौन ।


उत्तर : " चलतीं साथ पटरियाँ रेल की फिर भी मौन । " इस पद्यांश से कवि रेल और पटरियों के माध्यम से हमें सच्चे शुभचिंतक की पहचान करा रहे हैं । कवि का कहना है कि सच्चा शुभचिंतक अपने किए एहसानों को कभी भी उजागर नहीं करता । पटरियाँ रेल को अपने लक्ष तक पहुंचने में मदद करती है फिर भी वह मैन रहती है । उसी तरह से एक सच्चा शुभचिंतक हमारा मार्गदर्शन करता है, हमारी सहायता करता है । उसकी सहायता के कारण ही हम हमारे लक्ष तक पहुंचते है । फिर भी वह यह नहीं कहता कि मेरे कारण ही तू आज इस मुकाम पर है ।


२) काँटों के बीच
खिलखिलाता फूल
देता प्रेरणा ।


उत्तर : " काँटों के बीच खिलखिलाता फूल देता प्रेरणा ।"। यहाँ पर हमें कवि फूलों से प्रेरणा लेने के लिए कह रहे हैं । कवि का कहना है कि मुसीबत से घिर जाने पर भी हमें अपनी खुशी बरकरार रखनी है । फूल कांटों से घिरा रहने के बावजूद भी खिलखिलाते ( मुस्कुराना / प्रसन्न ) रहता है । अगर हम मुसीबत को देखकर उदास हो जाएंगे, रोने या गिड़गिड़ाने लग जाएंगे तो मुसीबत और भी बड़ी नजर आएगी । इसीलिए अपने ऊपर विश्वास रखिए और प्रसन्नता से उस मुसीबत का सामना कीजिए । 


प्रश्न: ५)  मन कविता में कुछ अन्य सवाल भी दिए गए है । 


हमें जोड़ियाँ मिलाने के लिए भी सवाल पूछा गया है: 


१) मछली - की जोड़ी हम [ प्यासी ] से लगा सकते है ।

२) गीतों के स्वर - अमर 

३) रेल की पटरियाँ - मौन 

४) आकाश - की जोड़ी हम [ सूना ] शब्द से लगा सकते हैं ।


प्रश्न: ६)  हमें परिणाम लिखने के लिए भी कहा गया है: 


१) सितारों का छिपना - आकाश का सुना हो जाना ।

२) तुम्हारा गीतों को स्वर देना - उन गीतों का अमर हो जाना । 


प्रश्न: ७) सरल अर्थ लिखना के लिए भी एक सवाल पूछा गया है । सरल अर्थ अर्थात simple meaning


१) मन की पीड़ा
छाई बन बादल
बरसीं आँखें ।


उत्तर: कवि का कहना है कि जब मन में पीड़ा होती है तब आँखें बादलों की तरह बरसती हैं ।


मन कविता स्पष्टीकरण | हमारी YouTube Link 👇


https://youtu.be/QqFO40KRKtE?si=YYR1fjxqgis4xaUA


प्रश्न: ८) पत्र लेखन: हमें पत्र लेखन के लिए एक प्रश्न भी दिया गया है । 


प्रश्न है, वक्तृत्व प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने के उपलक्ष्य में आपके मित्र / सहेली ने आपको बधाई पत्र भेजा है, उसे धन्यवाद देते हुए निम्न प्रारूप में पत्र लिखिए ।


२० अगस्त, २०२४


प्रिय मित्र मोहन, 

नमस्कार !


Mohan@gmail.com


तुम्हारा पत्र मिला । पत्र पढ़कर बहुत खुशी हुई ।


बधाई के लिए बहुत - बहुत धन्यवाद मित्र । मेरी इस उपलब्धि में तुम्हारा भी हक्क है । मुझे याद है कि तुम हमेशा से ही मुझे मंच पर जाने के लिए प्रोत्साहित करते थे । कक्षा सातवीं में जब मैं मंच पर जाने के लिए डर रहा था तब तुमने ही तो मेरा डर छूमंतर किया था । उसीका नतीजा है कि आज मैं बेझिजक मंच पर खड़े रहकर बोल सकता हूँ । 


मित्र, मेरी इस सफलता में तुम्हारे साथ ही साथ मेरी अध्यापिका सुजाता गायकवाड जी का भी हाथ है । तुमने मेरा डर भगाया और मेरी शिक्षिका ने मुझे सतत मार्गदर्शन किया । मैं दोनों का ही आभारी हूँ । मैं फिर से एक बार तुम्हे धन्यवाद कहता हूँ ।


तुम्हारे माता - पिता को मेरा प्रणाम कहना ।


तुम्हारा मित्र,

राजेश वाघमारे

भीमनगर, कांदिवली,

मुंबई । 


Rajesh@gmail.com



मन कविता | Explanation | Link 👇


https://www.mrsuryawanshi.com/2023/06/man-kavita-hindi-10th-class.html


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